छत्तीसगढ़ में बिलासपुर के 8वीं कक्षा के स्टूडेंट शाश्वत सिंह ठाकुर ने ऑनलाइन कराओके सिंगिंग प्रतियोगिता में इंडिया लेबल पर पहला स्थान हासिल किया है। ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ देश भक्ति गीत गाकर शास्वतों ने जजों का दिल जीत लिया और देश भर के प्रतिभागियों को पछाड़ते हुए टॉपर बन गया।
ऑनलाइन कराओके सिंगिंग प्रतियोगिता में बिलासपुर निवासी शाश्वत सिंह ठाकुर ने भी भाग लिया था। शाश्वत मसानगंज, आजाद नगर निवासी आर्किटेक्ट, इंजीनियर स्वर्गीय ठाकुर संतोष सिंह के बेटे हैं। शाश्वत को बचपन से ही संगीत में रुचि है। वह खैरारागढ़ संगीत विश्वविद्यालय में संगीत के चतुर्थ वर्ष का स्टूडेंट है। शाश्वत क्सालिकल संगीत सीख रहा है। साथ ही उनका सुगम संगीत, भजन और ग़ज़ल में भी रुझान है।
शाश्वत बचपन से ही गाने का शौकीन रहा है।
CG से अकेला प्रतियोगी था शाश्वत
इस प्रतियोगिता में भाग लेने वाला शाश्वत छत्तीसगढ़ से एकमात्र प्रतियोगी रहा। प्रतियोगिता का आयोजन प्रसिद्ध सिने कलाकार, निर्देशक देवेन्द्र दोड़के और प्रसिद्ध गायक और सामाजिक कार्यकर्ता शिवकुमार अवझे की ओर से किया गया। तीन राउंड में यह कॉम्पिटिशन आयोजित की गई थी। प्रतियोगिता में मुंबई, ठाणे, नागपुर, पुणे, अहमदनगर, दिल्ली, पंजाब, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, बंगाल, गोंदिया, वर्धा, भंडारा, गढ़चिरौली, चंद्रपुर, सहित देश के कई राज्यों के प्रतियोगियों ने भाग लिया।
प्रतियोगिता सभी के लिए खुली थी, इसलिए इसमें 7 साल से लेकर 75 वर्ष तक कि उम्र के लोगों ने हिस्सा लिया। बेहद टफ इस कॉम्पिटिशन के पहले दौर में 105 प्रतियोगी, दूसरे में 38 और तीसरे व अंतिम दौर में 14 प्रतियोगी थे। फाइनल राउंड में 13 प्रतियोगियों ने भाग लिया। जिसमें 7 प्रतियोगियों का चयन किया गया है।
DPS में 8वीं कक्षा का स्टूडेंट है शाश्वत
शाश्वत दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS) में कक्षा 8वीं का छात्र है। बचपन से ही उसने महारत हासिल की है। उसके टॉप कर खिताब जीतने पर पूरे परिवार और परिचितों में ख़ुशी की लहर है। बाल कलाकार शाश्वत सिंह को अब बधाई देने का सिलसिला शुरू हो गया है।
बिलासपुर में संगीत की शिक्षा भी ले रहे है शाश्वत
संगीत की शिक्षा आलोक पांडे सर से ग्रहण कर रहे हैं
दिल्ली पब्लिक स्कूल में संगीत के शिक्षक आलोक पांडे सर के द्वारा शाश्वत को संगीत तबला और गिटार की शिक्षा दी जा रही है। संगीत शिक्षक आलोक पांडे शाश्वत को एक होनहार छात्र बताया और भविष्य में ऊंचे आयाम हासिल करने के योग्य बताया। उन्होंने कहा कि बचपन से ही शाश्वत में उन्होंने संगीत के प्रति रुझान देख लिया था। अभ्यास के दौरान भी वह पूरी लगन और मेहनत से अभ्यास करता है संगीत शिक्षक आलोक पांडे ने शाश्वत के उज्जवल भविष्य की कामना की है।
देश में होने वाले ऑनलाइन कराओके सिंगिंग प्रतियोगिता में बिलासपुर छत्तीसगढ़ के निवासी शाश्वत सिंह ठाकुर ने प्रथम स्थान प्राप्त कर देश एवं शहर का नाम गौरान्वित किया है। शाश्वत , आर्किटेक्ट, इंजीनियर स्वर्गीय ठाकुर संतोष सिंह के सुपुत्र हैं। शाश्वत को बचपन से ही संगीत में रुचि है। शाश्वत खेरागढ़ संगीत विश्वविद्यालय में संगीत के चतुर्थ वर्ष के विद्यार्थी हैं। वे क्लासिकल संगीत सीख रहे हैं, साथ ही उनका सुगम संगीत, भजन और ग़ज़ल में भी रुझान है। शाश्वत दिल्ली पब्लिक स्कूल के कक्षा आठवी के छात्र हैं।वे संगीत की शिक्षा आलोक पांडे सर से ग्रहण कर रहे हैं।इस प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ से भाग लेने वाले शाश्वत एकमात्र प्रतियोगी थे। इस प्रतियोगिता का आयोजन प्रसिद्ध सिने कलाकार, निर्देशक श्री देवेन्द्र दोडके और प्रसिद्ध गायक और सामाजिक कार्यकर्ता श्री शिवकुमार अवझे द्वारा किया गया। यह प्रतियोगिता 3 राउंड में आयोजित की गई थी।प्रतियोगिता में मुम्बई ,ठाणे, नागपुर,पुणे,अहमदनगर, दिल्ली,पंजाब, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़,बंगाल, गोंदिया, वर्धा, भंडारा, गढ़चिरौली, चंद्रपुर, सहित भारत के कई राज्यों के प्रतियोगियों ने भाग लिया था। प्रतियोगिता सभी के लिए खुली थी, इसलिए इसमें 7 साल से लेकर 75 वर्ष तक कि उम्र के लोगों ने हिस्सा लिया था।
इस अत्यधिक प्रतिस्पर्धा प्रतियोगिता के पहले दौर में 105 प्रतियोगी, दूसरे में 38 और तीसरे और अंतिम दौर में 14 प्रतियोगी थे।
फाइनल राउंड में 13 प्रतियोगियों ने भाग लिया। जिसमे 7 प्रतियोगियों का चयन किया गया।
पहले 4 प्रतियोगियों को गोल्डन वॉइस नम्बर 1, 2, 3 का ई सर्टिफिकेट। 3 लोगो को प्रोत्साहन के लिए ई सर्टिफिकेट दिए जायेंगे।इस प्रतियोगिता का परीक्षणप्रतियोगिता का आयोजन प्रसिद्ध सिने कलाकार, निर्देशक देवेंद्र दोडके और प्रसिद्ध गायक और सामाजिक कार्यकर्ता शिवकुमार अवझे द्वारा सामाजिक कार्य के हिसाब से लोगों को लोकडाउन के दौरान सुकून मिले इस हिसाब से की गई थी। प्रतियोगिता 3 राउंड में आयोजित की गई थी। प्रतियोगिता में महाराष्ट्र के नागपुर, चंद्रपुर, गढ़चिरौली, भंडारा, गोंदिया, वर्धा, पुणे, अहमदनगर, ठाणे, मुंबई और पंजाब, दिल्ली, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और बंगाल सहित भारत के कई राज्यों के प्रतियोगियों ने भाग लिया। प्रतियोगिता सभी के लिए खुली थी । इसलिए इसमें 7 साल से लेकर 75 साल की उम्र के प्रतियोगियों ने हिस्सा लिया।
इस अत्यधिक प्रतिस्पर्धी प्रतियोगिता के पहले दौर में 105 प्रतियोगी, दूसरे में 37 और तीसरे और अंतिम दौर में 14 प्रतियोगी थे।
फाइनल राउंड में 13 प्रतियोगियों ने भाग लिया। जिसमें से 7 प्रतियोगियों का चयन किया गया।
पहले 4 प्रतियोगियों को गोल्डन वॉयस नं. यदि 1, 2, 3 का ई-सर्टिफिकेट | 3 लोगों को प्रोत्साहन के लिए ई-सर्टिफिकेट दिए जाएंगे। इस प्रतियोगिता का परीक्षण
1. डॉ प्रशांत गायकवाड़ गिनीज बुक – ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड धारक और कई सम्मानों से सम्मानित।
2. सौ विना उकुंडे – ऑल इंडिया रेडियो – दूरदर्शन, बी- हाय कलाकार, संगीत विशारद, निदेशक स्वरमंथन सुगम संगीत समूह, संगीत शिक्षक – विनायक राव देशमुख हाई स्कूल ।
3. प्रोफेसर सौ. भारती लाटनकर संगीत विशारद, थे ।
फाइनल राउंड में सौ वीणा उकुंडे के स्थान पर भरत नरुले ने परीक्षण किया। खास बात यह है कि इन सभी ने इस सामाजिक कार्य में निशुल्क सेवा दी ।
इस कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रणव हळदे, प्रथमेश गाडेकर, अयाती सूर्यवंशी, योगिता गाडेकर, निधि अवझे, संपदा अवझे, नमिता गाडेकर, सिमरन दोडके, स्वरंजलि गडेकर, आर्य भुजाडे और यशवंत चोपडे ने अथक परिश्रम लिए ।
Gr8 मेलोडीज़ के अंतिम विजेता इस प्रकार हैं –
1. शाश्वत सिंह ठाकुर, बिलासपुर गोल्डन वॉयस नं 1
2. अनन्या घोष, नागपुर
गोल्डन वॉयस नं 2
2. मधुकर दलवी, मुंबई
गोल्डन वॉयस नं 2
3. संजय फड़के, पंजाब गोल्डन वॉयस नं 3
सांत्वना पुरस्कार
4. सोनाली येल्वटकर
5. प्रणीता पटनायक
6. श्रवण मोरसकर
पिछले साल के प्रतियोगियों ने जोरदार मांग की थी कि प्रतियोगिता हर साल आयोजित की जाए और आयोजन समिति ने इस पर विचार ने किया और इस साल भी प्रतियोगिता आयोजित की गई।
पिछले साल के परीक्षकों के साथ-साथ इस साल के मेंटर भरतजी नरूले, राजू व्यास और सुनील वाघमारे बहुत मददगार थे। आयोजक प्रत्येक प्रतियोगी को ई-सर्टिफिकेट देंगे