बिलासपुर। जब घर की लड़ाई थाने पहुंच जाए तो वह परिवारिक लड़ाई नहीं कानूनी अपराध होता है। लेकिन यह बात तारबाहर के नव पदस्थ TI देवेश सिंह राठौर को नहीं मालूम या वह जानबूझकर मामले में पर्दा डाल रहे हैं। ऐसा ही एक मामला बिलासपुर के शहर के जानेमाने आर्किटेक्ट श्याम शुक्ला और उनके भाइयों के बीच चल रहा संपत्ति का विवाद थाने की दहलीज पर पहुंच चुका है। और तारबाहर के टीआई कह रहे हैं यह कोई अपराध नहीं मतलब साफ है कि तारबाहर के TI देवेश सिंह राठौर इस प्रकार के कृत्य को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहे हैं। जब पत्रकारों ने टीआई साहब से पूछना चाहा कि पूरा मामला क्या है।और इसमें क्या कार्यवाही कर रहे हैं तब टीआई साहब ने अपने पुलिसिया लहजे में कहा कि यह कोई अपराध नहीं मतलब साफ है कि TI साहब हत्या,बलात्कार डकैती को ही अपराध मानते हैं छोटी मोटी घटना को तो यूं ही चलता कर देते हैं। या फिर TI साहब को बिलासपुर की तासीर की जानकारी नहीं। जहां बिलासपुर के संवेदनशील IG चाहे दिन हो या रात छोटी-छोटी घटनाओं को यहां तक की ट्विटर और फेसबुक में दी गई शिकायत को भी संज्ञान में लेते हैं। और पीड़ित की मदद करते हैं। उस पर कार्रवाई करते हैं। बिलासपुर SSP पूरे समय सभी से मिलती हैं। लोगों की समस्याएं सुनती है। तथा उनकी समाधान करती है। ताकि शहर में अमन और शांति बनी रहे। वही TI देवेश सिंह राठौर का इस प्रकार से बयान देना गले से नीचे नहीं उतर रहा है। ऐसे में ऐसा लगता है कि सगे लड़ रहे हैं और TI साहब रिश्तेदारी निभा रहे हैं। जबकि पूरा मामला यह है कि आर्किटेक्ट श्याम शुक्ला की बेटी ने तारबाहर थाने में चाचा घनश्याम शुक्ला पर अपहरण कराने जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए शिकायत की है। उसने थाने में यह शिकायत चार जुलाई को की है। अभी तक मामला परिवार के बीच ही था। लेकिन जैसे मामला मीडिया में आया घनश्याम शुक्ला भी सामने आए और अपने बड़े भाई आर्किटेक्ट श्याम शुक्ला पर गंभीर आरोप लगाते हुए थाना प्रभारी तारबाहर, एसपी और आईजी से न्याय की गुहार लगाई है। उनका आरोप है कि बड़े भाई ने अपनी पुत्री के जरिए उनके खिलाफ पुलिस विभाग में झूठी शिकायत कराई है और अब उन्हें षडयंत्रपूर्वक बदनाम किया जा रहा है।
हंसा विहार कॉलोनी निवासी घनश्याम शुक्ला ने शुक्रवार को तारबाहर टीआई, एसपी और आईजी को ज्ञापन सौंपा है। जिसमे उन्होंने बताया है कि वे लोग चार भाई हैं। जिनमें उनके अलावा प्रमोद शुक्ला, श्याम कुमार शुक्ला, बलराम शुक्ला शामिल हैं।
उनका आरोप है कि उनके परिवार की संयुक्त संपत्ति को बिना उनकी सहमति के श्याम शुक्ला ने अपने नाम पर चढ़वा लिया है। उनका आरोप है कि बीते 14 जुलाई को उनके बड़े भाई श्याम शुक्ला ने अपनी बेटी से उनके नाम पर झूठी शिकायत कराई है। घनश्याम शुक्ला ने अपने ज्ञापन में क्या कहा है पढ़े पूरा पत्र__:
श्रीमान आरक्षी केंद्र प्रभारी
अरक्षी केंद्र, तारबाहर बिलासपुर छत्तीसगढ़
विषय: मेरी भतीजी कुमारी स्तुति शुक्ला आत्मजा श्री श्याम शुक्ला द्वारा दिनांक [4 जुलाई 2022 को, मेरे बड़े भाई श्री श्याम कुमार शुक्ला आर्किटेक्ट, निवासी- हंसा विहार कॉलोनी, बिलासपुर, छत्तीसगढ़ के षड़यंत्रपूर्ण निर्देश पर की गई झूठी एवं दुर्भावनापूर्ण शिकायत के सम्बन्ध में निवेदन पत्र।
महोदय,
निवेदन है कि, दुर्भाग्य से शिकायतकत्री मेरी सगी भतीजी है। मेरी उपरोक्त भतीजी कुमारी स्तुति शुक्ला सदैव एक संवेदनशील घरेलू बच्ची रही है, उसके पिता श्री श्याम शुक्ला द्वारा उसका एडमिशन लॉ कॉलेज में सोनीपत
हरियाणा में करा देने के बाद वर्ष 2019 में जब वह होस्टल गई तो वहाँ उसे हॉस्टल के अन्य बच्चों का उन्मुक्त व्यवहार पसंद नहीं आया तो वह मानसिक रूप से क्षुब्ध होकर घर वापस आने के लिए बार-बार घर पर फोन करने लगी और एक-दो महीने के भीतर ही बिलासपुर वापस लौट आई फिर अक्टूबर 209 में वापस सोनीपत गई किन्तु कोविड -9 के कारण फिर दिसंबर 209 में वापस लौट आई और यहीं रहकर ऑनलाइन पढाई करती रही है। मैं उसके द्वारा की गई उपरोक्त दुर्भाग्यपूर्ण झूठी शिकायत से अत्यंत दुखी एवं किंकर्तव्यविमूढ़ हूँ।
मेरे परिवार की संयुक्त संपत्ति (पुश्तैनी घर) विद्या नगर (खसरा नम्बर 73/ 24, ग्राम- जूना बिलासपुर) तहसील एवं जिला- बिलासपुर, छत्तीसगढ़ में स्थित है, मेरी माता स्व० उषा शुक्ला भार्या स्व० डी० डी० शुक्ला की वर्ष 1994 में मृत्यु होने के बाद उक्त संपत्ति के संयुक्त हिस्सेदार हम चार भाई, श्री प्रमोद शुक्ला, श्री श्याम कुमार शुक्ला, श्री बलराम शुक्ला एवं (मैं) घनश्याम शुक्ला हुए किन्तु लगभग 2 वर्ष पहले हमें पता चला कि, उक्त संपत्ति श्री श्याम कुमार शुक्ला ने हमारी किसी सहमति के बिना अपने नाम चढवा लिया है। वर्ष 2020 में ही मझले भाई श्री श्याम कुमार शुक्ला ने हमारी कंपनी “ईशा इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड” से बिना हमारी सहमति, बिना हमारा हिस्सा दिए, हमारा नाम हटा दिया और कोई भुगतान भी नहीं किया, उसके बाद मैंने
मार्च 2020 में ही श्री श्याम कुमार शुक्ला के साथ कामकाज करना बंद कर दिया। बाद में 3 जुलाई 2020 को श्री श्याम कुमार शुक्ला ने अपने पुत्र ईशान के जन्मदिवस पर हम सभी भाइयों और उनके परिजनों को बुलाया था और मुझसे चर्चा के दौरान कहा कि वे सारा हिसाब किताब ठीक कर देंगे किन्तु उन्होंने आज तक कोई समाधान नहीं किया है इसलिए हम लोग उनके विरुद्ध दावा प्रस्तुत करने की तैयारी कर रहे हैं।
हमारी कंपनी “ईशा इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड” का गठन 2007 में हुआ था लेकिन उक्त कम्पनी में कोई काम नहीं होता था। मैं मई 2011 में उक्त कम्पनी का निदेशक बना, उसके बाद मैंने उक्त कंपनी में काम-काज शुरू किया कंपनी में श्री श्याम कुमार शुक्ला आर्किटेक्चर का काम देखते थे और कंपनी एकाउंट्स उनके साले श्री रायपुर देखते थे. कंपनी कंपनी के शेष सभी कामकाज, यथा ओजेः प्रोजेक्ट के लिए धन की व्यवस्था करना ८52 6/6तयपु देखते थे। कंपनी के शेष सभी कामकाज मंदा ओ्और प्रोजेक्ट ऐश कल सम्बन्धी सभी काम मैं ही संभालता था धीरे-2 कम्पनी की साख और संपत्ति बढ़ती गई।
मेरे भाई श्री श्याम कुमार शुक्ला और उनके साले श्री राहुल मिश्र रायपुर ने कंपनी के आय के खातों से लाभ कम दिखाकर नकदी एवं अन्य तरीकों के जरिए श्री श्याम कुमार शुक्ला एवं मामा विकास तिवारी एवं अन्य परिजनों तथा कंपनी के नामपर सम्पत्तियाँ क्रय की और उनका किराया श्री श्याम कुमार शुक्ला ही लेते चले आ रहे हैं तथा कम्पनी के अन्य हिस्सेदारों को उसमें हिस्सा नहीं दे रहे हैं इस प्रकार आज की स्थिति में श्री श्याम कुमार शुक्ला ने अवैध रूप से हमारी उक्त कम्पनी और उससे अर्जित संपत्तियों पर बलात एकाधिकार कर लिया है।
मुझे कम्पनी से निकालने के बाद हमारी कंपनी “ईशा इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड” का काम-काज मंदा पड़ने लगा ते श्री श्याम कुमार शुक्ला ने, अगस्त 2021 में, मुझे फोन करके अपने घर भोजन के लिए बुलवाया था किन्तु मैंने उनके यहाँ जाने से मना कर दिया क्योंकि मैं उनसे आगे कोई व्यवसायिक रिश्ता रखना नहीं चाहता था तभी से श्री श्याम कुमार शुक्ला मुझसे व्यक्तिगत रंजिश रखने लगे।
मेरे भाई श्री प्रमोद शुक्ला एवं श्री बलराम शुक्ला शासकीय सेवक हैं एवं मैं तथा श्री श्याम कुमार शुक्ला निजी व्यवसायरत हैं इसलिए श्री श्याम कुमार शुक्ला को आशंका रहती है कि, मैं ही अन्याय का विरोध कर सकता हूँ। इसलिए वे येनकेनप्रकारेण मुझे विवादों में उलझाए रखना चाहते हैं।
दिनांक 9 जुलाई 202 को मैं विद्या नगर स्थित कार्यालय में मामा श्री विकास तिवारी के साथ अपनी फाइलें लेने गया था और फ़ाइल लेकर मामा श्री विकास तिवारी के साथ अपनी कार से जब हंसा विहार स्थित अपने घर लौटा तो श्री श्याम कुमार शुक्ला ने मामा श्री विकास तिवारी को फोन कर कहा कि, मैं स्तुति को भेज रहा हूँ पहले वह फ़ाइल चेक करेगी कि कहीं घनश्याम उनकी कोई फ़ाइल तो लेकर नहीं चला गया है, उसके बाद ही फ़ाइल गाडी से उतरेगी।
उस के बाद मेरी, भतीजी स्तुति शुक्ला ने भतीजे इशान शुक्ला के साथ आकर फाइलों को चेक किया तब जाकर मेरी फाइलें मुझे दीं। इस बात से नाराज होकर मैंने भी स्तुतिऔर इशान से कह दिया कि, जब परिवार में आपसी विश्वास ही नहीं बचा है तो तुम लोगों को आज से हमारे परिवार से बात-चीत करने की कोई ज़रूरत नहीं है।
उक्त तिथि के बाद आज तक मेरी उपरोक्त भतीजी कुमारी स्तुति शुक्ला से मेरी कोई बात-चीत नहीं हुई है। मेरे बड़े भाई श्री श्याम कुमार शुक्ला धनोउन्माद में अत्याचार पर उतर आए हैं उनके द्वारा षड़यंत्रपूर्वक मुझे बदनाम कर दबाव में डालने हेतु मेरी उपरोक्त भतीजी कुमारी स्तुति शुक्ला से झूठी एवं दुर्भावनापूर्ण शिकायत कराई गई है।
मुझे कई लोगों द्वारा यह भी बताया गया है कि, श्री श्याम कुमार शुक्ला द्वारा लोगों से यह कहा जा रहा है कि वह किसी आदिवासी हरिजन महिला से झूठी शिकायत कराकर मुझे जेल में डलवा देंगे और मुझे जेल भेजने के बाद मेरी सारी संपत्तियों पर कब्ज़ा कर लेंगे। मेंरे सभी अन्य भाइयों एवं उनके परिजनों को श्री श्याम कुमार शुक्ला द्वारा पिछले कई महीनों से धमकाया जा रहा है कि, यदि किसी ने भी मेरा समर्थन किया तो उसे वे जेल में डलवा देंगे जिसकी वजह से पूरे कुटुंब में भय व्याप्त है। टीआई, एसपी और आईजी को सौंपे गए।
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